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उत्तर:  'आरटीजीएस' नामक शब्द संक्षिप्त का अभिप्राय रीयल टाइमग्रास सेटलमेंट से है, जिसे आदेश के आधार पर (नोटिंग किए बिना) किसी आदेश द्वारा अलग-अलग निधि अंतरण के सतत (रीयल टाइम) सेटलमेंट के रूप में परिभाषित किया जा सकता है । रीयल टाइमका अभिप्राय अनुदेशों पर बाद में कार्रवाई करने के बजाय ठीक उसी समय कार्रवाई करना है जब अनुदेश प्राप्त होते हैं, ‘ग्रास सेटलमेंटका अभिप्राय निधि अंतरण अनुदेशों का अलग-अलग (अनुदेश दर अनुदेश आधार पर) सेटलमेंट से है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए निधियों का सेटलमेंट भारतीय रिजर्व बैंक की बहियों में होता है, इसलिए भुगतान अंतिम और अपरिवर्तनीय होते हैं । 

उत्तर: एनईएफटी एक इलेक्ट्रॉनिकी निधि अंतरण प्रणाली है जो डिफर्ड नेट सेटलमेंट के आधार पर संचालित होती है जो बैच के रूप में लेनदेन का निपटान करता है । डीएनएस में, यह निपटान निश्चित समय तक प्राप्त किए गए सभी लेनदेनों के साथ होता है। इन लेनदेनों (प्राप्त करने योग्य और भुगतान करने योग) का एनईएफटी में कुल योग किया जाता है जबकि आरटीजीएस लेनदेनों में व्यक्तिगत रूप से लेनदेनों का सैटल किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, एनईएफटी घंटे के बैंचों में प्रचालित होता है । (साप्ताहिक दिनों में सुबह 8 बजे से शाम 7 अजे तक बारह सेटलमेंट होते हैं और शनिवार के दिन सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक छ: सेटलमेंट होते हैं ।) निर्धारित सेटलमेंट टाइम के बाद शुरू किये गये किसी भी लेनदेन के लिए अगले निर्धारित सेटलमेंट समय तक इंतजार करना होगा और इसके विपरीत आरटीजीएस में लेनदेन संपूर्ण कारोबार घंटों के दौरान होते रहते हैं ।  

उत्तर: आरटीजीएस प्रणाली का प्रयोग मुख्य रूप से बड़े मूल्य वाले लेनदेन के लिए किया जाता है। आरटीजीएस के माध्यम से प्रेषित की जाने वाली न्यूनतम धनराशि 2 लाख रूपये है । आरटीजीएस लेनदेन के लिए कोई ऊपरी सीमा नहीं है ।

उत्तर: सामान्य परिस्थितियों में प्रेषणकर्ता बैंकों द्वारा निधि अंतरण किए जाने पर वास्तविक समय में ही लाभार्थी शाखाओं में निधि प्राप्त होने की अपेक्षा की जाती है । लाभार्थी बैंक को निधि अंतरण संदेश प्राप्त होने के 30 मिनट के भीतर ही लाभार्थी के खाते में धनराशि क्रेडिट हो जाती है ।

उत्तर: प्राप्तकर्ता बैंक में धनराशि क्रेडिट हो जाने पर रिजर्व बैंक की तरफ से धनराशि प्रेषित करने वाले बैंक को संदेश प्राप्त होता है । इसके आधार पर प्राप्तकर्ता बैंक में धनराशि क्रेडिट हो जाने पर धनराशि प्रेषित करने वाला बैंक एसएमएस के जरिए प्रेषणकर्ता ग्राहक को सूचना दे सकता है ।

उत्‍तर: जी, हां । यदि किसी कारण अर्थात् खता संख्या न होने, खता बंद किए जाने इत्यादि से लाभार्थी ग्राहक के खाते में निधियां क्रेडिट करना संभव न हो, तो किसी लाभार्थी ग्राहक के खाते में क्रेडिट करने के लिए किसी आरटीजीएस सदस्य द्वारा प्राप्त की गयी निधियां प्राप्तकर्ता बैंक के पीआई पर भुगतान की प्राप्त से एक घंटे के भीतर अथवा आरटीजीएस कारोबार दिवस की समाप्ति से पहले, जो भी पहले हो, मूल आरटीजीएस सदस्य को लौटा दी जाएगी । प्रेषित करने वाले बैंक को धनराशि वापस प्राप्त हो जाने पर ग्राहक के खाते में मूल रूप से की गयी डेबिट प्रविष्टि‍ को प्रत्यावर्तित कर दिया जाता है ।

उत्तर: आरटीजीएस प्रणाली के जरिए निधि अंतरण के लिए बैंकों द्वारा लगाए गए सेवा प्रभारों को तर्कसंगत बनाने के लिए आरबीआई द्वारा एक व्यापक फ्रेमवर्क अधिदेशित किया गया है । कृपया आरटीजीएस लेनदेने के लिए सेवा प्रभार से संबंधित विवरण के लिए आरबीआई की साइट  देखें । 

उत्तर: प्रेषणकर्ता ग्राहक को आरटीजीएस प्रेषण शुरू करने के लिए बैंक को निम्नलिखित सूचना उपलब्ध करानी होगी ।

  • प्रेषित की जाने वाली धन राशि
  • प्रेषणकर्ता ग्राहक की खाता संख्या जिससे धनराशि डेबिट की जानी है
  • लाभार्थी के बैंक और शाखा का नाम
  • प्राप्तकर्ता शाखा की आईएफएससी संख्या
  • लाभार्थी ग्राहक का नाम
  • लाभार्थी ग्राहक की खाता संख्या
  • प्रेषक की ओर से प्राप्तकर्ता के लिए सूचना, यदि कोई है । 

उत्तर: लाभार्थी ग्राहक अपनी बैंक शाखा से आईएफएससी कोड़ प्राप्त कर सकता है । आईएफसी कोड चेक लीफ पर भी उपलब्ध होता है । आईएफएससी की सूची आरबीआई की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है । लाभार्थी द्वारा इस कोड संख्या और बैंक शाखा का विवरण प्रेषणकर्ता ग्राहक को दिया जा सकता है । 

उत्तर: जी, नहीं । भारत में सभी बैंक शाखाएं आरटीजीएस सक्षम नहीं हैं। वर्तमान में 100,000 से ज्यादा बैंक शाखाएं आरटीजीएस सक्षम हैं। ऐसी शाखाओं की सूची आरबीआई की वेबसाइट (http://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/RTGS/DOCs/RTGEB0815.xlsx) पर उपलब्ध है ।

उत्तर: यह प्रेषणकर्ता ग्राहक और प्रेषणकर्ता बैंक के बीच के समझौते पर निर्भर करता है । इंटरनेट बैंकिंग सुविधायुक्त कुछ बैंकों में यह सेवा उपलबध है । एक बार लाभार्थी के बैंक खाते में निधि क्रेडिट हो जाने पर, प्रेषणकर्ता ग्राहक को ई-मेल या एसएमएस के माध्यम से अपने बैंक से ओर से इसकी पुष्टि प्राप्‍त होती है। लेनदेन ट्रैकिंग के लिए ग्राहक बैंकों के आरटीजीएस/ एनईएफटी ग्रहक सुविधा केन्द्रों से भी संपर्क कर सकता है। 

उत्तर: आरटीजीएस के जरिए निधि अंतरण के लिए प्रेषणकर्ता बैंक शाखा और प्राप्तकर्ता बैंक शाखा दोनों को ही आरटीजीएस सक्षम होना चाहिए। ये सूची पहले से ही सभी आरटीजीएस सक्षम शाखाओं पर उपलब्ध है। इसके अलावा, यह सूचना आरबीआई की वेबसाइट (http://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/RTGS/DOCs/RTGEB0815.xlsx) पर भी उपलबध है। इस बात पर विचार करते हुए कि आरटीजीएस प्रणाली के अतंगर्त 30,000 हजार से अधिक शहरों/नगरों, तालुकाओं में   110,000 से अधिक शाखाओं के बारे में यह सूचना प्राप्त करना कठिन नहीं होगा ।