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उपभोक्ता सहायता पोर्टल (संस्करण 2.1)
ई-कॉमर्स का तात्पर्य - इंटरनेट पर वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री से है।
  • सुविधा
  • समान उत्पादों का बेहतर चयन
  • छूटप्राप्त तथा प्रतिस्पर्धी कीमतें
  • घर पर डिलीवरी
  • वस्तु वापिसी नीति
  • धन वापिसी नीति
  • कीमतों की तुलना
  • भीड़रहित खरीददारी
  • जब कभी आप ऑनलाइन शॉपिंग करो तो फाइन प्रिंट को सावधानी से पढ़ना चाहिए।.
  • शिपिंग प्रभारों, डिलीवरी टाइम और रद्द करने और लौटाने संबंधी नीतियों और वारंटी संबंधी नियमों के बारे में जानकारी के संबंध में अपने को आश्वस्त करें।
  • अपनी वित्तीय जानकारी और पासवर्ड को सुरक्षित रखें तथा भुगतान हमेशा यूआरएल के ‘https और ताला छवि’ जैसे सुरक्षित गेटवेज के माध्यम से करें।
  • यदि आप वेबसाइट पर पहली बार शॉपिंग कर रहें है तो हमेशा कैश ऑन डिलीवरी भुगतान विकल्प का चयन करें।
  • सदैव वेबसाईट के लैंडलाईन फोन और डाकपता की जांच करे।
जब कभी आप ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं तो उत्पाद पर सामान्यतः विक्रेता की वारंटी अथवा विनिर्माता की वारंटी होती है। इसका तात्पर्य है कि या तो ऑनलाइन कंपनी जो बेच रही है इसकी सेवाओं की जिम्मेदारी लेगी अथवा निर्माता जिसने उत्पाद बनाया है।
यह वांछनीय है कि सभी ई-कॉमर्स कंपनियों में धन वापिसी अथवा वस्तु लौटाने की नीति होनी चाहिए, किंतु ऐसा कोई कानून नहीं है जो इसे लागू करे। तथापि, यदि कोई कमी हो तो उपभोक्ता को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित किया जाता और उसके लिए प्रतितोष प्राप्त कर सकते हैं।
आर्डर को पहुंचाने का समय भिन्न और कंपनी के पास उपलब्धता के आधार पर होता है और इसे सामान्यतः कंपनी द्वारा बिक्री के समय वेबसाइट पर घोषित किया जाता है।
यदि किसी को उत्पाद के देरी से पहुंचने के कारण तात्कालिक अथवा वास्तविक घाटा होता है तो वह उपभोक्ता मंच में मामला दर्ज करके उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत मुआवजा प्राप्त कर सकता है, क्योंकि भारत में कोई विनियामक निकाय नहीं है जो ई-कॉमर्स संबंधी उपभोक्ता शिकायतों का निपटान कर सके।
जी हां, ऑनलाइन उत्पाद खरीदते समय सदैव एम.आर.पी. की जांच करनी चाहिए तथा ऑफलाइन कीमतों से तुलना करनी चाहिए।
ऑनलाइन बैंकिंग, ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग और ई-कॉमर्स के प्रयोग में अत्यधिक वृद्धि होने के साथ वित्तीय धोखाधड़ी करने के लिए फिशिंग की घटनाओं में तदनुरूपी वृद्धि हुई है। फिशिंग में कपटपूर्ण संवेदनशील सूचना (उदाहरण के लिए खाते के ब्यौरे, पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड ब्यौरे शामिल होते हैं) विश्वास प्राप्त संस्था द्वारा छिपा दिए जाते हैं।
  • किसी भी व्यक्ति द्वारा किए गए ऐसे लुभावने कॉल, दौरे अथवा ई-मेल संदेशों से बचे जो कर्मचारियों अथवा अन्य आंतरिक सूचनाओं के बारे में पूछते हो।
  • व्यैक्तिक जानकारी अथवा अपने संगठन के ढांचे अथवा नेटवर्क सहित इससे संबंधित जानकारी न दें जब तक कि आप सुनिश्चित न कर लें कि वह ऐसी जानकारी प्राप्त करने के लिए प्राधिकृत है।
  • वेबसाईट की सुरक्षा की जांच किए बिना इंटरनेट पर कोई संवेदनशील सूचना न दें।
  • वेबसाईट के यूआरएल पर ध्यान दें। संदिग्ध वेबसाईट वैध वेबसाईट से मिलती जुलती हो सकती है किंतु यूआरएल स्पैलिंग अथवा विभिन्न क्षेत्र (अर्थात् डॉट कॉम बनाम डॉट नेट) में परिवर्तन का प्रयोग करें।
  • यदि आपको विश्वास नहीं है कि यह ई-मेल कानूनी है या नहीं, तो आप सीधे कंपनी से संपर्क करके इसकी पुष्टि करने की कोशिश करें।
  • इस ट्रैफिक को कम करने के लिए एंटी वायरस सॉफ्टवेयर, फायरवॉल्स तथा ई-मेल फिल्टर्स का प्रयोग करें।
  • यदि आपको लगता है कि आपका वित्तीय खाता संकट में है तो तत्काल अपनी वित्तीय संस्था से संपर्क करे और उस खाते को बंद कर दें जिसका गलत प्रयोग किया गया हो।
  • तत्काल ऐसे पासवर्ड को बदल दें जिसे आपने प्रकट कर दिया हो। यदि आपने उसी पासवर्ड को कई स्रोतों के लिए प्रयोग किया हो।
  • पहचान को चुराए जाने के अन्य लक्षणों को ध्यान में रखे और सतर्क रहें।
  • ऑनलाइन खरीददारी करते समय, उत्पाद के बड़े फोटो देखें, क्योंकि आप उत्पाद को उठाकर और पकड़कर स्पर्श करने और इसकी जांच करने की क्षमता को त्याग रहे हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि उत्पाद को विभिन्न कोणों से दिखाया जाए। यह भी सुनिश्चित करें कि फोटो उस पर जूम करने, विशेषकर स्मार्ट फोन से, के उद्देश्य से काफी बड़ा है।
  • ऑनलाइन खरीददारी करने वाले ग्राहकों को यह जानना चाहिए कि यदि उन्हें सहायता की आवश्यकता होगी तो वे खरीदी गई वस्तु को छोड़ने नहीं जा रहे हैं। इसका सरलतम तरीका वेबसाईट के हेडर अथवा फुटर में फोन नम्बर की जांच करना है। यह भी सुनिश्चित करें कि क्या ग्राहक सेवा के लिए कोई आसानी से प्राप्त किया जाने वाला ई-मेल पता है – और कोई व्यक्ति ई-मेल की जांच और प्रत्युत्तर नियमित रूप से प्रदान कर रहा है।

Awareness material on Internet Safety for Digital Transaction by Consumer is available http://consumerhelpline.gov.in/ncd2016/microsite/