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समय: राष्ट्रीय अवकाश को छोड़कर सभी दिन(09:30 प्रात से 05:30 मध्याह्न तक )


उपभोक्ता सहायता पोर्टल (संस्करण 2.1)
देश में उच्‍चतर शिक्षा का विनियमन विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यू.जी.सी.) द्वारा किया जाता है।
उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 में यथापरिभाषित के अनुसार शिक्षा प्रदान करने का कार्य एक सेवा है और शैक्षणिक संस्‍थानों से संबंधित शिकायतें उपभोक्‍ता न्‍यायालयों में दायर की जा सकती है।
उपभोक्‍ता न्‍यायालयों द्वारा, विश्‍वविद्यालयों/शैक्षणिक संस्‍थानों के निबंधनों और शर्तों अथवा उनके द्वारा तैयार की गई नियम पुस्तिकाओं अथवा ब्राशरों के संबंध में प्रश्‍न नहीं उठाया जा सकता।
उपभोक्‍ता न्‍यायालय द्वारा, विज्ञापन की गलत रूप में प्रस्‍तुत करने और कॉलेज की मान्‍यता के बारे में प्रॉस्‍पेक्‍टस से संबंधित शिकायतों के संबंध में कार्रवाई की जा सकती है।
यदि पाठ्यक्रम अनुमोदित नहीं है अथवा ब्रॉशरों या विज्ञापनों में किए गए दावे के अनुसार क्‍लासें नहीं ली जा रहीं अथवा वादाकृत सुविधाओं में कमी है तो विद्यार्थी पूरी फीस वापिस लेने के पात्र हैं।
यदि कोई विद्यार्थी सत्र के मध्‍य में किसी संस्‍थान को छोड़ना चाहता है और पूरे पाठ्यक्रम के लिए अग्रिम रूप से भुगतान की गई राशि वापिस लेना चाहता है तो वह इसका पात्र होगा। संस्‍थान द्वारा प्रसंस्‍करण शुल्‍क की कटौती की जा सकती है।
फीस की रसीद पर यह लिखा हुआ हो सकता है कि एक बार दी गई फीस वापिस नहीं की जाएगी। किंतु यदि वे कतिपय सेवाओं के लिए भुगतान कर रहे हैं और संस्‍थान वो सेवाएं देने में विफल रहता है तो वे पाठ्यक्रम से नाम वापिस ले सकते हैं और अग्रिम रूप से भुगतान की गई फीस को वापिस करने की मांग कर सकते हैं। न्‍यायालयों द्वारा दिए गए निर्णयों के अनुसार ब्रॉशरों में दिए गए नियम देश के कानून से ऊपर नहीं है।
शैक्षणिक संस्‍थान मूल प्रमाणपत्र अपने पास नहीं रख सकते।
शैक्षणिक संस्‍थानों द्वारा पाठ्यक्रम के आरंभ में ही किसी विद्यार्थी से पूरे पाठ्यक्रम की फीस नहीं मांगी जा सकती।
विश्‍वविद्यालयों से, परीक्षाओं के संचालन अथवा विद्यार्थियों को किसी विशेष विषय अथवा कोर्स में प्रवेश देने, उपलब्‍ध सीटों की संख्‍या के संबंध में उपभोक्‍ता मंचों द्वारा प्रश्‍न नहीं पूछे जा सकते, क्‍योंकि यह सांविधिक कार्य है और उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 में दी गई ‘सेवाओं’ की परिभाषा के दायरे में नहीं आते।
विदेश में उच्चतर शिक्षा प्राप्‍त करने के इच्‍छुक किसी भावी विद्यार्थी को उस देश का विद्यार्थी वीजा अनिवार्यत: प्राप्‍त करना होगा।
यह, पासपोर्ट में किया जाने वाला एक विशेष पृष्‍ठांकन है, जिसे सरकारों द्वारा उन विद्यार्थियों को जारी किया जाता है जो योग्‍य शैक्षणिक संस्‍थानों में नामांकित होते हैं।
विद्यार्थी वीजा, गैर-अप्रवासी वीजा होता है, जिसके लिए धारक को नागरिकता प्राप्‍त करने की आवश्‍यकता नहीं होती।
आवेदकों द्वारा वीजा के लिए वी.एफ.एस. वेबसाइटों, जिन पर आवेदकों को व्‍यापक जानकारी और दिशा-निर्देश दिए गए हैं, पर स्‍वयं ही आवेदन किया जा सकता है। वीजा प्रदान करना या न करना आवेदक की पात्रता और दस्‍तावेजों पर निर्भर होगा।
वीजा प्राप्‍त करना कोई अधिकार नहीं है और जिस देश से इसे मांगा जा रहा है उसके द्वारा, उसके दूतावास अथवा उच्‍चायोग या वाणिज्‍यदूतावास के माध्‍यम से इसे देने से इन्‍कार किया जा सकता है |

विदेश में आवेदन के लिए मूलभूत कदम निम्‍नलिखित है:

  • अपनी रूचि वाले देश, विश्‍वविद्यालय और पाठ्यक्रम का पता लगाना;
  • आवेदन फार्म के लिए विश्‍वविद्यालय से अनुरोध करना;
  • विभिन्‍न प्रकार के अपेक्षित टेस्‍ट देना;
  • निबंध, एस.ओ.पी. तथा सिफारिशी पत्रों को व्‍यवस्थित और तैयार करना;
  • आवेदन फार्मों को भरना और अपेक्षित दस्‍तावेजों सहित भेजना;
  • विभिन्‍न टेस्‍टों में प्राप्‍त अंकों के बारे में विश्‍वविद्यालयों को सूचित करना।

अपेक्षित दस्‍तावेज निम्‍नलिखित है:

  • वैध पासपोर्ट;
  • एक पासपोर्ट आकार का फोटोग्राफ (ब्‍लैक एंड व्‍हाइट/कलर);
  • कांसुलर अनुभाग में उपलब्‍ध गैर- अप्रवासी वीजा आवेदन (फार्म 156);
  • संबंधित संस्‍थान के प्राधिकृत अधिकारी द्वारा निष्‍पादित और आवेदक द्वारा हस्‍ताक्षरित फार्म आई-20;
  • शैक्षिक और रहने की लागत की भरपाई करने के लिए वित्‍तीय क्षमता का प्रमाण;
  • वीजा फीस जिसे बैंक ड्राफ्ट के माध्‍यम से भारतीय रुपये में भुगतान किया जाएगा।
चाहे संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका हो, यूनाइटेड किंगडम हो अथवा अन्‍य कोई देश हो विदेश में शिक्षा ग्रहण करने के लिए अंग्रेजी में निपुणता अनिवार्य है। आपको, देश, विश्‍वविद्यालय और आपके द्वारा आवेदन किए जाने वाले पाठ्यक्रम के आधार पर TOEFL, IELTS, TSE जैसे टेस्‍ट या अन्‍य टेस्‍ट देने होंगे। इन टेस्‍टों में अपेक्षित न्‍यूनतम अंक विश्‍वविद्यालय और पाठ्यक्रम के आधार पर अलग- अलग हो सकते हैं। प्रवेश के लिए न्‍यूनतम अपेक्षताएं प्राय: प्रत्‍येक विभाग और विश्‍वविद्यालय द्वारा अपने स्‍तर पर निर्धारित की जाती है।
प्रवेश के लिए प्रत्‍येक विश्‍वविद्यालय और महाविद्यालय की अपनी अपेक्षताएं होती हैं। तथापि, अधिकांश विद्यालयों की प्रवेश नीतियों में काफी लोचशीलता होती है। भिन्‍न-भिन्‍न देशों में ये अपेक्षताएं भिन्‍न-भिन्‍न हैं।