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समय: राष्ट्रीय अवकाश को छोड़कर सभी दिन(09:30 प्रात से 05:30 मध्याह्न तक )


उपभोक्ता सहायता पोर्टल (संस्करण 2.1)
- यह सभी वस्‍तुओं और सेवाओं पर लागू होता है जब तक कि केंद्र सरकार द्वारा विशिष्‍ट रूप से छूट प्रदान न की गई हो; 
- इसमें सभी क्षेत्र – निजी, सार्वजनिक और सहकारी – आते हैं; 
- यह एक अतिरिक्‍त समाधान उपलब्‍ध कराता है; 
- इस अधिनियम के प्रावधान प्रतिपूरक प्रकृति के हैं; 
- इसमें ऐसे न्‍यायनिर्णय प्राधिकारी उपलब्‍ध कराने का प्रावधान है जो सरल, त्‍वरित और किफायती है; 
- इसमें राष्‍ट्रीय, राज्‍य और जिला स्‍तरों पर उपभोक्‍ता संरक्षण परिषदों की स्‍थापना का प्रावधान भी है।
अधिनियम के तहत उपभोक्‍ताओं को निम्‍नलिखित छ: उपभोक्‍ता अधिकार प्रदान किए गए हैं : 
1. सुरक्षा का अधिकार; 
2. संसूचित किए जाने का अधिकार; 
3. चयन का अधिकार; 
4. सुनवाई का अधिकार; 
5. प्रतितोष पाने का अधिकार; 
6. उपभोक्‍ता शिक्षा का अधिकार
वह व्‍यक्ति जो ऐसे प्रतिफल के लिए जिसका संदाय किया गया है या वचन दिया गया है या भागत: संदाय किया गया है या भागत: वचन दिया गया है या अस्‍थगित संदाय की किसी पद्धति के अधीन माल अथवा सेवाओं का क्रय करता है ऐसे माल का कोई प्रयोगकर्ता भी है जब ऐसा प्रयोग ऐसे व्‍यक्ति के अनुमोदन से किया जाता है।
वह व्‍यक्ति: जो वस्‍तुएं मुफ्त में प्राप्‍त करता है; जो सेवाएं मुफ्त में प्राप्‍त करता है; जो वस्‍तुओं को पुन: बिक्री के लिए अथवा किसी वाणिज्यिक प्रयोजनार्थ प्राप्‍त करता है; जो किसी वाणिज्यिक प्रयोजन के लिए सेवाओं का लाभ उठाता है; जो सेवाओं के अनुबंध के तहत सेवाएं प्राप्‍त करता है, उपभोक्‍ता नहीं है। तथापि, - किसी व्‍यक्ति द्वारा स्‍वरोजगार के माध्‍यम से विशेषकर अपनी आजीविका चलाने के प्रयोजनार्थ, वस्‍तुओं को खरीदना और उनका प्रयोग करना तथा सेवाएं प्राप्‍त करना वाणिज्यिक प्रयोजन में शामिल नहीं है।
जी, नहीं। वाणिज्यिक प्रयोजनार्थ बनाई गई वस्‍तुएं अथवा सेवाएं इस अधिनियम के दायरे से उस सीमा तक मुक्‍त है जब तक कि उनका प्रयोजन स्‍वरोजगार के माध्‍यम से अपनी आजीविका चलाना है।

शिकायत निम्‍नलिखित द्वारा दायर की जा सकती है:

  • उपभोक्‍ता द्वारा;
  • किसी स्‍वैच्छिक उपभोक्‍ता संगठन द्वारा;
  • केन्‍द्र सरकार अथवा राज्‍य सरकार द्वारा;
  • जहां समान हित रखने वाले अनेक उपभोक्‍ता हों, एक अथवा अधिक उपभोक्‍ताओं द्वारा; और
  • किसी उपभोक्‍ता की मृत्‍यु हो जाने की दशा में उसके कानूनी उत्तराधिकारी अथवा प्रतिनिधि द्वारा।

ये, उपभोक्‍ताओं को उनके विवादों का सरल, त्‍वरित और किफायती प्रतितोष प्रदान करने के लिए अधिनियम के तहत स्‍थापित की गई अर्ध-न्‍यायिक एजेन्सियां हैं। इनकी स्‍थापना तीन स्‍तरों - जिला, राज्‍य और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर की गई है जिन्‍हें क्रमश:

  • जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष मंच या उपभोक्‍ता मंच;
  • ाज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग या राज्‍य आयोग; और
  • राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग अथवा राष्‍ट्रीय आयोग के नाम से जाना जाता है।
- यदि वस्‍तुओं अथवा सेवाओं का मूल्‍य और दावा की गई क्षतिपूर्ति, यदि कोई है, की राशि 20 लाख रूपये तक हो तो जिला मंच में;
- यदि वस्‍तुओं अथवा सेवाओं का मूल्‍य और दावा की गई क्षतिपूर्ति, यदि कोई है, की राशि 20 लाख रूपये अधिक किन्‍तु 1 करोड़ रूपये से कम हो तो राज्‍य आयोग में; और
- यदि वस्‍तुओं अथवा सेवाओं का मूल्‍य और दावा की गई क्षतिपूर्ति, यदि कोई है, की राशि 1 करोड़ रूपये से अधिक हो तो राष्‍ट्रीय आयोग में शिकायत दायर की जा सकती है।
कोई भी शिकायत उस जिला मंच में दायर की जाएगी जिसके स्‍थानीय क्षेत्राधिकार में प्रतिपक्ष का निवास है अथवा वह कारोबार संचालित करता है या उसका कोई शाखा कार्यालय है या वह लाभ के लिए व्‍यक्तिगत रूप से कार्य करता है अथवा जहां कार्रवाई के कारण का पूर्णत: अथवा भागत: उद्भव हुआ है। उपभोक्‍ता अपने निवास स्‍थान के क्षेत्राधिकार में शिकायत दायर नहीं कर सकता।
“जिला मंच” की स्‍थापना राज्‍य सरकार द्वारा राज्‍य के प्रत्‍येक जिले में की गई है। आवश्‍यकता पड़ने पर राज्‍य सरकार किसी जिले में अतिरिक्‍त मंचों का गठन कर सकती है। जिला मंचों के संबंध में जानकारी, जिले के जिला समाहर्ता/जिला मजिस्‍ट्रेट से प्राप्‍त की जा सकती है। जिला मंचों के पतों और संपर्क विवरणों की जानकारी भी एन.सी.डी.आर.सी. की वेबसाइट http://ncdrc.nic.in से प्राप्‍त की जा सकती है।
राज्‍य सरकारों द्वारा प्रत्‍येक राज्‍य में एक जिला आयोग की स्‍थापना की गई है जो कि अधिकांशत: राज्‍य की राजधानी में अवस्थित हैं। राज्‍य आयोगों के पतों और संपर्क विवरणों की जानकारी भी एन.सी.डी.आर.सी. की वेबसाइट http://ncdrc.nic.in से प्राप्‍त की जा सकती है।
केंद्र सरकार द्वारा एक राष्‍ट्रीय आयोग की स्‍थापना की गई है जो कि नई दिल्‍ली में अवस्थित है। राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग का पता इस प्रकार है – उपभोक्‍ता न्‍याय भवन, एफ. ब्‍लॉक, जी.पी.ओ. कॉम्‍पलैक्‍स, आई.एन.ए., नई दिल्‍ली - 110023 । राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग के कार्यकरण के संबंध में जानकारी एन.सी.डी.आर.सी. की वेबसाइट http://ncdrc.nic.in से प्राप्‍त की जा सकती है।
कोई भी व्‍यक्तिगत रूप से शिकायतकर्ता द्वारा अथवा उसके एजेंट द्वारा दायर की जा सकती है। इसे न्‍यायालय शुल्‍क सहित पंजीकृत डाक द्वारा भेजा जा सकता है। सामान्‍यत: शिकायत की तीन प्रतियां भेजी जानी अपेक्षित होती है जिनमें से एक शासकीय प्रयोजनार्थ रख ली जाती है, एक प्रतिपक्ष को अग्रेषित की जाती है और एक शिकायतकर्ता को दी जाती है। यदि प्रतिपक्षों की संख्‍या अधिक है तो तदनुसार शिकायत की अधिक प्रतियों की आवश्‍यकता होगी।
उपभोक्‍ता मंच अर्द्ध-न्‍यायिक निकाय है जो सरल और त्‍वरित न्‍याय प्रदान करते हैं। इन्‍हें जटिल न्‍यायिक प्रक्रियाओं से मुक्‍त रखा गया है, इनका तरीका अत्‍यंत अनौपचारिक प्रकार का है और ये सिविल न्‍यायालय की जटिलताओं से मुक्‍त हैं। अत:, इनमें वकील अथवा किसी अन्‍य तर्क देने वाले की कोई आवश्‍यकता नहीं है और उपभोक्‍ता स्‍वयं ही अथवा अपने प्रतिनिधि के माध्‍यम से मामला दायर कर सकता है और अपनी शिकायत प्रस्‍तुत कर सकता है।
  • शिकायतकर्ता का नाम, विवरण और पता;
  • प्रतिपक्ष अथवा पक्षों का नाम, विवरण और पता;
  • शिकायत से संबंधित तथ्‍य और यह कब और कहां उत्‍पन्‍न हुई;
  • आरोपों, यदि कोई हों, के समर्थन में दस्‍तावेज;
  • राहत – जो शिकायतकर्ता प्राप्‍त करना चाहता है।
शिकायत, कार्रवाई का कारण उत्‍पन्‍न होने की तारीख से दो वर्ष के भीतर दायर की जानी चाहिए। इसका अर्थ उस दिन जब सेवाओं में कमी अथवा वस्‍तुओं में दोष आया/पाया गया से दो वर्ष की अवधि होगा। इसे शिकायत दायर करने के लिए सीमांत अवधि के रूप में भी जाना जाता है।
जिला मंच/राज्‍य आयोग/राष्‍ट्रीय आयोग के समक्ष दायर की जाने वाली प्रत्‍येक शिकायत के साथ, यथानिर्धारित शुल्‍क, किसी राष्‍ट्रीयकृत बैंक के रेखांकित डिमांड ड्राफ्ट अथवा रेखांकित भारतीय पोस्‍टल ऑर्डर के रूप में संलग्‍न होना चाहिए, जो राज्‍य आयोग के रजिस्‍ट्रार के पक्ष में उस स्‍थान पर देय होगा जहां राज्‍य आयोग अथवा राष्‍ट्रीय आयोग अवस्थि‍त है। इस प्रकार प्राप्‍त की गई राशि को संबंधित जिला मंच द्वारा जमा करा दिया जाएगा।

उपभोक्‍ता मंच द्वारा निम्‍नलिखित राहतों का आदेश दिया जा सकता है:

  • उपयुक्‍त प्रयोगशाला द्वारा वस्‍तुओं में निकाले गए दोष को दूर करना;
  • वस्‍तुओं को उसी प्रकार की दोषमुक्‍त वस्‍तुओं से बदलना;
  • शिकायतकर्ता को कीमत अथवा शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान किए गए प्रभारों, जैसा भी मामला हो, को वापिस करना;
  • उस राशि का भुगतान करना, जो प्रतिपक्ष की लापरवाही से उपभोक्‍ता को हुए किसी नुकसान या चोट की क्षतिपूर्ति के रूप में उपभोक्‍ता मंच द्वारा निर्धारित की जाए। इन परिस्थितियों में, जिला मंच को, यदि वह उचित समझे, दंडात्‍मक प्रभार प्रदान करने की शक्तियां भी दी गई है;
  • प्रश्‍नगत वस्‍तुओं के दोषों अथवा सेवाओं में कमी को दूर करना;
  • अनुचित व्‍यापार प्रथा अथवा प्रतिबंधित व्‍यापार प्रथा को समाप्‍त करना और इसे न दोहराना;
  • खतरनाक वस्‍तुओं की पेशकश बिक्री के लिए न करना;
  • बिक्री के लिए पेश की जा रही खतरनाक वस्‍तुओं को वापस लेना;
  • खतरनाक वस्‍तुओं के निर्माण को बंद करना और खतरनाक प्रकृति की सेवाओं की पेशकश को रोकना;
  • यदि मंच का यह मानना है कि ऐसे अनेक उपभोक्‍ताओं को हानि अथवा क्षति हुई है जिनकी पहचान आसान नहीं है तो उस राशि का भुगतान करना जो मंच निर्धारित करे;
  • भ्रामक विज्ञापन के प्रभाव को समाप्‍त करने के लिए, ऐसे भ्रामक विज्ञापन को जारी करने वाले प्रतिपक्ष के खर्च पर सुधारात्‍मक विज्ञापन जारी करना;
  • पक्षों को पर्याप्‍त लागत प्रदान करना।

यदि कोई उपभोक्‍ता किसी उपभोक्‍ता मंच के आदेश से व्‍यथित है तो वह उसके आदेश से 30 दिनों की अवधि के भीतर उच्‍चतर मंच में अपील कर सकता है। अपील मुख्‍यत: निम्‍नलिखित के अनुसार की जाएगी:

  • जिला मंच के आदेश के विरूद्ध राज्‍य आयोग को;
  • राज्‍य आयोग के आदेश के विरूद्ध राष्‍ट्रीय आयोग को;
  • राष्‍ट्रीय आयोग के आदेश के विरूद्ध उच्‍चतम न्‍यायालय को।