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उपभोक्ता सहायता पोर्टल (संस्करण 2.1)
जीवन की रक्षा करने अथवा स्‍वास्‍थ्‍य को बहाल करने या बनाए रखने के लिए औषधियां आवश्‍यक हैं। अत: यह सुनिश्चित करना महत्‍वपूर्ण है कि उपभोक्‍ताओं को गुणवत्तायुक्‍त औषधियां उचित मूल्‍यों पर प्राप्‍त हों। अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए सन् 1945 में औषध नियम तैयार किए गए थे। देश में औषधियों के आयात को विनियमित करना केन्‍द्र सरकार की जिम्मेदारी है, जबकि औषधियों के विनिर्माण, बिक्री और वितरण के लिए लाईसेंस प्रदान करना राज्‍य सरकारों की जिम्मेदारी है किन्‍तु इसका प्रवर्तन केन्‍द्र के साथ-साथ राज्‍य सरकारों,दोनों, द्वारा शासित होता है।
प्रसाधन से अभिप्रेत, मानव शरीर अथवा उसके किसी भाग की सफाई करने, उसे सुन्‍दर बनाने, उसका आकर्षण बढ़ाने अथवा उसकी बनावट में सुधार लाने के लिए आशयित रगड़ने, डालने, छिड़कने या स्‍प्रे करने वाली, पेश की जाने वाली अथवा अन्‍यथा प्रयोग की जाने वाली कोई वस्‍तु है, और इसमें प्रसाधन के घटक के रूप में प्रयोग की जाने वाली कोई वस्‍तु भी शामिल है।
    कोई औषधि अथवा प्रसाधन मिसब्रांडेड समझी जाएगी यदि – (क) उसकी क्षति छिपाने के लिए उस पर काफी रंग, लेप, पाउडर अथवा पॉलिस किया हुआ है अथवा उसे चिकित्सीय गुणों के अनुरूप बनाया गया हो जो उसमें वास्तव में नहीं हैं; अथवा (ख) यदि उसे निर्धारित तरीके से लेबल नहीं किया गया है; अथवा (ग) उसके लेबल अथवा डिब्बे अथवा और उससे संलग्न अन्य किसी वस्तु पर ऐसा कोई विवरण, डिजाईन अथवा डिवाईस, जो कोई झूठा दावा करती है अथवा जो किसी भी प्रकार से झूठी अथवा भ्रामक है, लगाई गई हो।
किसी औषधि को मिलावटी माना जाएगा यदि – 
(क) वह सम्पूर्ण अथवा भागतः, अशुद्ध, दुर्गंधयुक्त अथवा सड़ा हुए पदार्थ बनाई गई हो; 
अथवा 
(ख) उसे अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों, जहां यह किसी अशुद्धि से दूषित हो सकती हो अथवा जहां इससे स्वास्थ्य को हानि पहुंच सकती हो, में पैक करके अथवा स्टोर करके तैयार किया गया हो; 
अथवा
 (ग) उसका डिब्बा, सम्पूर्ण या भागतः, किसी विषैले अथवा हानिकारक पदार्थ, जो इसकी सामग्री को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बना सकते हैं, से बनाया गया हो; 
अथवा 
(घ) उसमें केवल रंगने के उद्देश्य से निर्धारित किए गए रंग से किसी अन्य रंग का इस्तेमाल अथवा शामिल किया गया हो; 
अथवा 
(ङ) इसमें कोई ऐसा हानिकारक अथवा विषैला पदार्थ शामिल हो जो इसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बना सकता है; 
अथवा
 (च) इसमें कोई ऐसा पदार्थ मिलाया गया हो ताकि इसकी गुणवत्ता और समर्थता कम हो जाए।
कोई औषधि अथवा प्रसाधन नकली समझी जाएगी यदि -
 (क) उसे किसी ऐसे नाम के तहत बनाया गया है जो किसी दूसरी औषधि अथवा प्रसाधन से संबंधित है; 
अथवा
(ख) यह किसी अन्य औषधि अथवा प्रसाधन की नकल हो, अथवा उसका विकल्प हो अथवा धोखा देने, पेश करने अथवा इसके लेबल या डिब्बे पर किसी अन्य औषधि अथवा प्रसाधन का नाम लगाने के उद्देश्य से उसे किसी अन्य औषधि अथवा प्रसाधन, जब तक कि यह साफ और स्पष्ट रूप से चिह्नित न की गई हो ताकि ऐसी किसी अन्य औषधि अथवा प्रसाधन के साथ इसकी वास्तविक विशेषता और पहचान की कमी उजागर हो सके, के सदृश बनाया गया हो; 
अथवा 
(ग) इसके लेबल या डिब्बे पर औषधि विनिर्माण से संबंधित ऐसे किसी व्यक्ति-विशेष अथवा कम्पनी का नाम, जो जाली अथवा मौजूद न हो, लगाया गया हो।
औषधि अथवा प्रसाधन का कोई क्रेता अथवा मान्यताप्राप्त कोई उपभोक्ता संस्थान, चाहे ऐसा व्यक्ति उस संस्था का सदस्य हो अथवा नहीं, निर्धारित तरीके से आवदेन करके और निर्धारित शुल्क का भुगतान करके, उसके द्वारा खरीदी गई किसी औषधि अथवा प्रसाधन को जांच अथवा किसी सरकारी विश्लेषक के समक्ष विश्लेषण के लिए प्रस्तुत करने का हकदार होगा।
चिकित्सा पेशे में कोई औषधि, जिसके डिब्बे पर लेबल लगाया जाता है, मुफ्त नमूनों के रूप में वितरण के उद्देश्य से नहीं होती है और कोई औषधि - जिस पर कोई विशिष्ट चिह्न अथवा औषधि पर किसी प्रकार का उत्कीर्ण लेख अथवा किसी कैमिस्ट के परिसर में बेचे जाने अथवा स्टॉक किए जाने के उद्देश्य को दर्शाते हुए उसके डिब्बे पर लेबल लगाया गया हो - कर्मचारी राज्य बीमा निगम, केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना, सरकारी मेडिकल स्टोर डिपो, सशस्त्र सेना मेडिकल स्टोर अथवा अन्य किसी सरकारी संस्थान द्वारा उपभोग किए जाने के लिए नहीं बनाई जाती है।
मुद्रित किया गया अधिकतम खुदरा मूल्य भुगतान किए जाने योग्य अधिकतम राशि है। तथापि, कोई दवाई इससे कम कीमत पर बेची जा सकती है।
यदि कोई खुदरा विक्रेता खुली मात्रा (अनपैक्ड) दवाईयां बेचता है तो ऐसी दवाईयों का मूल्य डिब्बे पर लगाये गए लेबल पर मुद्रित मूल्य की यथानुपातिक राशि से अधिक नहीं होना चाहिए।
प्रत्येक कैमिस्ट/खुदरा विक्रेता द्वारा दवाईयों की बिक्री के लिए रसीद प्रदान करना और कैश/क्रेडिट मैमो की प्रति बनाए रखना अनिवार्य है।
नेशनल फॉर्मास्यूटिक प्राइसिंग अथॉरिटी, एफ.टी.ए./राज्य औषधि नियंत्रक, और जिले का औषधि निरीक्षक राष्ट्रीय/राज्य/जिला स्तर पर प्रवर्तन प्राधिकरण हैं।
संबंधित राज्य के क्षेत्र राज्य औषधि नियंत्रक/ औषधि संयुक्त नियंत्रक/औषधि उप नियंत्रक/औषधि सहायक नियंत्रक/औषधि निरीक्षक इत्यादि। इनमें से किसी के पास भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।
किसी दवाई पर मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक मूल्य वसूलना, औषधि मूल्य नियंत्रक आदेश, 2013 के दांडिक प्रावधानों के दायरे में आता है। किसी दवाई की गुणवत्ता, औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के अंतर्गत आती है। औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम का प्रवर्तन एफ.डी.ए./राज्य के औषधि नियंत्रक संगठन द्वारा तथा औषधि मूल्य नियंत्रक आदेश (डी.पी.सी.ओ.) का कार्यान्वयन राज्य स्तर पर किया जाता है। अतः, दवाई के मूल्यों के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता के संबंध में सभी शिकायतें जिले के औषधि निरीक्षक अथवा राज्य औषधि नियंत्रक के पास दर्ज करवाई जा सकती है। मूल्यों के उल्लंघन के संबंध में शिकायतें, सीधे एन.पी.पी.ए. में भी दर्ज करवाई जा सकती है।
  • फॉर्मुलेशन का नाम
  • फॉर्मुलेशन के संघटक
  • पैक का आकार
  • विनिर्माता का पता
  • विनिर्माण लाईसेंस संख्या
  • विनिर्माण की तारीख
  • समाप्ति की तारीख
  • अधिकतम खुदरा मूल्य (सभी कर सहित) इत्यादि
शिकायतकर्ता, राज्य स्तर पर औषधि एवं प्रसाधन आयुक्त को लिखित में शिकायत भेज सकते हैं।