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उपभोक्ता सहायता पोर्टल (संस्करण 2.1)
कृषि के तहत शामिल की गई गतिविधियों को तीन उप-श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है अर्थात् कृषि ऋण, कृषि अवसंरचना और सहायक गतिविधियां।

कृषि संबंधी शिकायतें निम्नानुसार हैं: -

  • कृषि आदान जैसे : बीज; खाद/उर्वरक; जैवनाशक;
  • सिंचाई
  • मशीनीकरण की कमी
  • मृदा अपरदन
  • कृषि विपणन
  • अपर्याप्त भंडारण सुविधा
  • अपर्याप्त
  • परिवहन
  • पूंजी की दुर्लभता

कृषि ऋण के प्रमुख स्रोत निम्नानुसार हैं:

  • सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंक
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
  • सहकारी समितियां
  • भूमि विकास बैंक आदि
बैंकों को प्राथमिक क्षेत्र ऋण के तहत प्राप्त ऋण आवेदनों के लिए पावती प्रदान करनी चाहिए। बैंक बोर्ड द्वारा एक समय-सीमा निर्धारित की जानी चाहिए जिसके तहत बैंक अपने निर्णय आवेदकों को लिखित में सूचित करता है।
बैंक ऋणों पर ब्याज की दर समय-समय पर भारतीय रिजर्व बैंक के बैंकिंग विनियमन विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार दी जाएगी। प्राथमिक क्षेत्र दिशानिर्देश प्राथमिक क्षेत्र ऋणों के लिए कोई अधिमान्य दर निर्धारित नहीं करते हैं।
प्राथमिक क्षेत्र ऋण संबंधी नवीनतम अनुदेश – लक्ष्य और वर्गीकरण भारतीय रिजर्व बैंक के दिनांक 1 जुलाई, 2015 के परिपत्र संख्या एफआईडीडी.सीओ.प्लान.बीसी.04/04.09.01/2015-16 (15 दिसम्बर, 2015 तक संशोधित) के तहत जारी किए गए हैं।
1) आदान सब्सिडी:
आदानों के वितरण के जरिए सब्सिडी उन मूल्यों पर दी जाती है जो कि इन आदानों के लिए मानक बाजार मूल्य से कम हैं। इसलिए सब्सिडी की मात्रा वितरित किए गए आदान की प्रति ईकाई के दो मूल्यों के बीच के अंतर के बराबर होगी। स्वाभाविक रूप से सब्सिडी की अनेक किस्मों के नाम इस श्रेणी में डाले जा सकते हैं:
(क) उर्वरक सब्सिडी:
किसानों को सस्ते रसायनिक अथवा गैर-रसायनिक उर्वरकों का वितरण। यह उर्वरक के विनिर्माता (घरेलू अथवा विदेशी) को दिए गए मूल्य और किसानों से प्राप्त मूल्य के बीच अंतर के बराबर है।
(ख) सिंचाई सब्सिडी:
किसानों को दी गई सब्सिडी जो कि उपयुक्त सिंचाई सुविधाएं प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा वहन की जाती है। यह सस्ते निजी सिंचाई उपकरण जैसे पंप सेट के जरिए भी हो सकती है।
(ग) ऊर्जा सब्सिडी:
बिजली सब्सिडी का तात्पर्य है कि सरकार किसानों को कम दरों पर बिजली की आपूर्ति करती है। किसानों द्वारा विजली का उपयोग मुख्य रूप से सिंचाई उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
(घ) बीज सब्सिडी:
सरकार द्वारा अधिक उपज वाले बीज कम दरों पर प्रदान किए जा सकते हैं। ऐसे उत्पादन वाले बीजों के उत्पादन के लिए सरकार द्वारा अनुसंधान और विकास गतिविधायं भी शुरू की गई हैं। इन पर किया जाने वाला व्यय किसानों को प्रदान किए गए व्यय की भांति है।
(ङ) ऋण सब्सिडी:
यह किसानों से वसूले गए ब्याज और ऋण देने की वास्तविक लागत के बीच अंतर तथा अन्य लागतें जैसे कि डूबे हुए ऋणों को बट्टे खाते में डालना है। गरीब किसानों के लिए ऋण की उपलब्धता मुख्य समस्या है।
जी, हां। फसल, कृषि-उपज, ऋण पर लिए गए कृषि उपकरण जैसे कि ट्रैक्टर, पंप आदि जैसी मुख्य परिस्थितियों का बीमा करवाना आवश्यक है।
एगमार्कनेट पोर्टल, कृषि बाजारों, राज्य विपणन बोर्डों/निदेशालयों से संबंधित व्यापक क्षेत्र सूचना नेटवर्क से समर्थित कृषि विपणन संबंधी भारत सरकार का पोर्टल है।
यह पोर्टल भारत में कृषि विपणन संबंधी स्थिर और गतिशील, दोनों, सूचनाएं प्रदान करता है। स्थिर सूचनाएं-अवसंरचना संबंधी(भंडारण, मालगोदाम, शीतगृह, श्रेणीकरण और पैकिंग सुविधाएं), बाजार संबंधी (बाजार-शुल्क/प्रभार, तौलन, संभलाई, बाजार कार्यकर्ता, विकास कार्यक्रम, बाजार कानून, बाजार समितियों का संघटन, आय और व्यय आदि) और प्रोन्नयन संबंधी जानकारी (मानक, श्रेणी, लेबलिंग, स्वच्छता और पादप स्वच्छता) - इत्यादि हैं।