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उपभोक्ता सहायता पोर्टल (संस्करण 2.3)
उचित देखभाल करने में विफल रहना सामान्य शब्दों में लापरवाही होता है। यह तब होता है जब कोई चिकित्सक अपने पेशे के मानकों का निष्पादन करने में असफल रहता है।
लापरवाही के तीन घटक निम्नानुसार हैं:
1. प्रतिवादी वादी की देखभाल के कर्तव्य को पूरा नहीं करता।
2. प्रतिवादी देखभाल के कर्तव्य का उल्लंघन करता है।
3. वादी को इस उल्लंघन के कारण किसी प्रकार की क्षति का सामना करना पड़ता है।
किसी पेशेवर स्वास्थ्य सेवाप्रदाता जैसे- चिकित्सक, नर्स, डेंटिस्ट, टैक्निशियन, हॉस्पिटल अथवा हॉस्पिटल के कार्यकर्ता – जिसका उपचार रोगी के लिए उसको मिले इसी तरह के प्रशिक्षण और अनुभव के साथ देखभाल के मानकों से बिल्कुल अलग है, जिसके परिणामस्वरूप किसी रोगी अथवा रोगियों को हुई हानि के संबंध में लापरवाही का दावा चिकित्सीय दुर्व्यवहार है।
सन् 1955 में, उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा चिकित्‍सा पेशे को उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत लाया गया और चिकित्‍सा उपचार को ‘सेवाओं’ का नाम दिया गया।
सामान्य तौर पर, चिकित्सा परिणामों की कोई गारंटी नहीं होती है, और अप्रत्याशित अथवा असफल परिणामों का अर्थ अनिवार्य रूप से लापरवाही किया जाना नहीं होता है। किसी चिकित्सीय लापरवाही के मामले को सिद्ध करने के लिए, उपभोक्ता को, प्रक्रिया के लिए लागू देखभाल के मानकों से चिकित्सक के विचलन के परिणामस्वरूप हुई हानि अथवा क्षति को दर्शाना होता है।
जी, नहीं। चिकित्सक किसी भी चिकित्सीय उपचार की पूर्ण सफलता की गारंटी नहीं दे सकता, चूंकि, रोगी की आयु और स्वास्थ्य, बीमारी की अवस्था और रोगी के शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करते हुए, यह प्रत्येक मामले में भिन्न होगी।
गम्भीर बीमारियों तथा सर्जिकल उपचार के दौरान, रोगी से सूचित सहमति प्राप्त करना अपेक्षित है। यदि रोगी सहमति देने में सक्षम नहीं है, तो रोगी के परिवार के निकटतम सदस्य अथवा अटेंडेंट से सहमति लिया जाना अपेक्षित है। तथापि, यदि सहमति पर हस्ताक्षर करने के लिए कोई भी व्यक्ति उपलब्ध नहीं है और रोगी चिकित्सा स्थिति के कारण उस पर हस्ताक्षर करने में सक्षम नहीं है, तो चिकित्सीय उपचार में देरी नहीं की जा सकती।
सबसे पहले सम्‍बन्धित अस्‍पताल के चिकित्‍सा अधीक्षक (एम.एस.) को लिखित शिकायत दें और उसकी प्रति अपने क्षेत्र के मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी (सी.एम.ओ.)/सिविल सर्जन को भी दें। यदि कोई उत्तर प्राप्‍त नहीं होता है या आप सम्‍बन्धित अधिकारी द्वारा दिए गए उत्तर से सन्‍तुष्‍ट नहीं है तो आपको अपनी शिकायत लिखित रूप में अपने क्षेत्र की राज्‍य चिकित्‍सा परिषद (एस.एम.सी.) को भेजनी। यदि आप एस.एम.सी. के उत्तर से भी सन्‍तुष्‍ट नहीं है तो आप अपनी शिकायत भारतीय चिकित्‍सा परिषद (एम.सी.आ.) को भेज सकते हैं। यदि शिकायत आपराधिक किस्‍म की है तो पीडित उपभोक्‍ता द्वारा स्‍थानीय पुलिस थाने में शिकायत दायर की जा सकती है। तथापि, पुलिस थाने में किसी प्रकार की शिकायत दर्ज कराने से पूर्व विशेषज्ञ की राय लेनी अपेक्षित होगी। चिकित्सीय लापरवाही के कारण होने वाले नुकसान के लिए आप किसी उपभोक्‍ता मंच/आयोग, सिविल न्‍यायालय और दांडिक न्‍यायालय, जैसा भी मामला हो, में भी शिकायत दायर कर सकते हैं।
चिकित्सक के साथ अपनी प्रथम बैठक से लेकर उसके साथ अपने अंतिम सम्पर्क से संबंधित सभी तथ्यों को शामिल करते हुए आप शिकायत दर्ज करके उपभोक्ता मंच में संपर्क कर सकते हैं। चिकित्सा रिकार्डों के साथ-साथ लापरवाही के दावों का समर्थन करने संबंधी किसी अन्य चिकित्सा विशेषज्ञ की राय दावे को सुदृढ़ करेगी।

उपभोक्‍ता के रूप में रोगी के अधिकार निम्‍नलिखित हैं:

  • रोगी को अपनी बीमारी के बारे में बताने का पूरा अधिकार है; वे अपने चिकित्‍सीय रिकार्ड के बारे में बता सकते हैं।
  • रोगियों को यह बताया जाना चाहिए कि उन्‍हें कौन सा उपचार/दवाएं दी जा रही हैं। उन्‍हें जोखिमों और साईड इफेक्‍ट्स, यदि कोई हों, के बारे में बताया जाना चाहिए। उन्‍हें उपचार के बारे में प्रश्‍न करने और स्‍पष्‍टीकरण मांगने का अधिकार है।
  • रोगी को डॉक्‍टर की अर्हता जानने का अधिकार है।
  • रोगी को यह अधिकार है कि डॉक्‍टर द्वारा शारीरिक जांच के समय उसके साथ उचित व्‍यवहार किया जाए और उसकी लाज का वांछित ध्‍यान रखा जाए।
  • रोगी को अपनी बीमारी के प्रति गोपनीयता बरतने का अधिकार है और डॉक्‍टर से भी यही आशा की जाती है।
  • यदि रोगी को सुझाई गई दवाओं अथवा इलाज के बारे में कोई सन्‍देह है तो उसे दूसरे डॉक्‍टर की सलाह लेने का अधिकार है।
  • रोगी को यह जानने का अधिकार है कि सुझाया गया आप्रेशन/सर्जरी क्‍या है और उसमें सम्‍भावित जोखिम क्‍या है। यदि वह अन्‍य कारणों से अचेत है अथवा निर्णय ले पाने में सक्षम नहीं है तो उसके निकट सम्‍बन्‍धी को संसूचित करते हुए सहमति ली जानी आवश्‍यक है।
  • रोगी को अनुरोध पर, डॉक्‍टर/अस्‍पताल से अपने चिकित्‍सा रिकार्ड/ मामले के कागजात लेने का अधिकार है।
  • यदि रोगी को किसी अन्‍य अस्‍पताल ले जाने की आवश्‍यकता हो तो उसे इसका कारण जानने का अधिकार है और डॉक्‍टर के परामर्श से अपनी पसन्‍द बताने का अधिकार भी है।
  • रोगियों को स्‍वयं द्वारा भुगतान किए गए बिलों के ब्‍यौरे जानने का अधिकार है।