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1.1 गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनी (एनबीएफसी) वह कम्‍पनी है जो कम्पनी अधिनियम, 1956 के तहत पंजीकृत है, और ऋण एवं अग्रिम, सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकरण द्वारा जारी किए जाने वाले शेयर्स/स्टॉक्स/ बॉण्ड्स/डिबेंचर्स/सिक्यूरिटीज के अधिग्रहण अथवा लीजिंग, किराया-क्रय, बीमा व्यापार, चिट व्यापार की प्रकृति की जैसी अन्‍य विपणन योग्‍य प्रतिभूतियों के व्‍यापार में रत है।
1.2 ऐसी कोई गैर बैंकिंग संस्था जो एक कंपनी है और उसका प्रमुख व्यापार किसी स्कीम या प्रबंध के तहत एकमुश्त अथवा अंशदान के रूप में किस्तों में अथवा किसी अन्य तरीके से जमा को स्वीकार करना है, को भी एक गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनी (रेजीड्यूरी नॉन-बैंकिंग कम्पनी) माना जाएगा।

गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां, ऋण देती हैं और निवेश करती हैं तथा इसीलिए इनकी गतिविधियां बैंकों की गतिविधियों से मिलती-जुलती हैं, तथापि इनमें कुछ अंतर हैं, जो नीचे दिए गए हैं:
i. गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां मांग जमाओं को स्वीकार नहीं कर सकती;
ii. गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां भुगतान और निपटान प्रणाली के रूप में कार्य नहीं करती तथा स्वयं पर आहरित चेक जारी नहीं कर सकती।

एन.बी.एफ.सी. को - (क) जमा में दानदारियों के प्रकार के संदर्भ में और गैर-जमा स्वीकार करने वाली एन.बी.एप.सी. (ख) गैर-जमा लेने वाली एन.बी.एफ.सी. अपने आकार में प्रणाली स्वरूप महत्वपूर्ण है और अन्य गैर-जमा रखने वाली कंपनियां (एन.बी.एफ.सी.-एन.डी.एस.आई और एन.बी.एफ.सी.-एन.डी.) और (ग) उनके द्वारा की गई गतिविधियों के प्रकार के अनुसार श्रेणीकृत किया गया है। इस व्यापक श्रेणी में विभिन्न प्रकार के एन.बी.एफ.सी. निम्नानुसार है:

  • परिसम्पत्ति वित्त कंपनी
  • निवेश कंपनी
  • ऋण कंपनी
  • अवसंरचनात्मक वित्त कंपनी
सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां सार्वजनिक जमाओं को स्वीकार करने के लिए पात्र नहीं है। केवल वे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां जिन्हें बैंक ने विशिष्ट प्राधिकार दिया है, को सार्वजनिक जमाओं को स्वीकार/धारित करने की अनुमति है।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को न्यूनतम 12 माह की अवधि और अधिकतम 60 माह की अवधि के लिए सार्वजनिक जमाओं को स्वीकार/नवीकृत करने की अनुमति है। वे मांग पर पुनः भुगतान योग्य जमाओं को स्वीकार नहीं कर सकती हैं।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित दर से अधिक ब्याज दरों को नहीं दे सकती हैं। वर्तमान दर 12.5 प्रतिशत प्रति वर्ष है। एक माह से कम अवधि शेष होने की दशा में ब्याज दिया जा सकता है अथवा शमनीय किया जा सकता है।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां जमाकर्ताओं को उपहार अथवा प्रोत्साहन अथवा अन्य अतिरिक्त लाभ नहीं दे सकती हैं।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (कुछेक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को छोड़कर) के पास न्यूनतम जमा श्रेणी ऋण दर होनी चाहिए।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा जमाओं के पुनर्भुगतान की गारंटी भारतीय रिजर्व बैंक नहीं देता है।

प्रार्थित जमाओं के सम्‍बन्‍ध में कंपनी द्वारा जारी आवेदन प्रपत्र में कंपनी के बारे में कुछेक अनिवार्य घोषणाएं की जानी चाहिएं।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के साथ जमाओं को रखते समय, निम्नलिखित पहलुओं को ध्यान रखना चाहिए:-

एक उपयुक्त जमा रसीद दी जाती है जिसमें जमाकर्ता का नाम, जमा की तारीख, शब्दों और अंकों में राशि, देय ब्याज की दर और परिपक्व राशि के साथ परिपक्व जमा राशि के पुनर्भुगतान की तारीख जैसे ब्यौरे होने चाहिएं। जमाकर्ता को उपर्युक्त पर ध्यान देना चाहिए और यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि रसीद विधिवत हस्ताक्षरित हों और कंपनी की तरफ से कंपनी द्वारा प्राधिकृत अधिकारी की मुहर लगी होनी चाहिए।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की तरफ से सार्वजनिक जमाओं को एकत्रित करने वाले ब्रोकरों/एजेंटों आदि के मामले में जमाकर्ताओं को स्वयं को संतुष्ट करना चाहिए कि ब्रोकर्स/एजेंट विधिवत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा प्राधिकृत है।

भारतीय रिजर्व बैंक कंपनी की वित्तीय सुरक्षा की वर्तमान स्थिति अथवा कंपनी द्वारा दिए गए किसी भी प्रकार के वक्तव्यों की यथार्थता के लिए अथवा दिए गए अभिवेदनों अथवा व्यक्त की गई राय और कंपनी द्वारा जमाओं के पुनर्भुगतानों/उत्तरदायित्वों के निवर्हन के बारे में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी अथवा गारंटी स्वीकार नहीं करता।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के जमाकर्ताओं को जमा बीमा सुविधा उपलब्ध नहीं है।

कुछेक परिसम्पत्ति वित्त कंपनियों को छोड़कर, एक गैर-रेटिंग वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां सार्वजनिक जमाओं को स्वीकार नहीं करती है। 15% के सी.आर.ए..आर. वाली अरेडिट ए.पी.सी. कंपनियों के मामले में एक अपवाद है जो इसकी शुद्ध निधियों के आधार पर कुछ सीमा तक बिना ऋण रेटिंग के सार्वजनिक जमा स्वीकार कर सकती है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां क्रिसिल, केयर, आई.सी.आर.ए. और एफ.आई.टी.सी.एच., रेटिंग इंडिया प्राईवेट लिमिटेड और ब्रिकवर्क रेटिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नामक पांच कंपनियों में से किसी एक द्वारा अपनी रेटिंग करवा सकती है।
यदि कोई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी जमा के पुनर्भुगतान में चूक करती है तो जमाकर्ता, जमाओं की वसूली के लिए कंपनी लॉ बोर्ड, अथवा उपभोक्ता मंच में जा सकते हैं अथवा अदालत में सिविल मुकदमा दर्ज कर सकता है।
जब कोई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी ऐसी जमा राशि की निबंधन और शर्तों के अनुसार किसी जमा अथवा उसके किसी भाग को देने में असफल होती है तो कंपनी लॉ बोर्ड अपनी प्रक्रिया पर अथवा जमाकर्ता के आवेदन पर आदेश द्वारा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी को ऐसी जमा राशि अथवा उसके भाग को तुरंत अथवा ऐसी समय अवधि में और ऐसी परिस्थितियों के अध्यधीन जो आदेश में विनिर्धारित की गई हों, भुगतान करने का निदेश देती है। भुगतान करने बाद, कंपनी को भारतीय रिजर्व बैंक के स्थानीय कार्यालय के साथ अनुपालन करने की आवश्यकता होगी।
जैसा कि उपर्युक्त स्पष्ट किया गया है, जमाकर्ता क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के अनुसार निर्धारित शुल्क के साथ कंपनी लॉ बोर्ड के उपयुक्त बैंच को विहित प्रपत्र में आवेदन भेजकर कंपनी लॉ बोर्ड में जा सकते हैं।

जी, हां। जमाकर्ता कोई एक अथवा सभी निवारण प्राधिकरणों अर्थात् उपभोक्ता मंच, कोर्ट अथवा कंपनी लॉ बोर्ड में जा सकता है।
जी, नहीं। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के विरूद्ध शिकायतों की सुनवाई के लिए कोई लोकायुक्त नहीं है। तथापि, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के क्रेडिट कार्ड संचालनों के संबंधि, यदि कोई शिकायतकर्ता शिकायत दर्ज होने की तारीख से अधिकतम 30 दिनों की अवधि के भीतर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी से कोई संतोषजनक समाधान प्राप्त नहीं करता है तो ग्राहक को अपनी शिकायतों के निवारण के लिए संबंधित बैंकिंग लोकायुक्त के कार्यालय में जाने का विकल्प होगा। 
सभी गैर-बैकिंग वित्तीय कंपनियों का एक शिकायत निवारण अधिकारी होगा, जिसके नाम और संपर्क ब्यौरे अवार्य रूप से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के परिसरों में प्रदर्शित होंगे। शिकायत को शिकायत निवारण अधिकारी के पास ले जाया जा सकता है। यदि शिकायतकर्ता गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी द्वारा किए गए निपटान से संतुष्ट नहीं होता है तो वह शिकायत के साथ भारतीय रिजर्व बैंक के निकटतम कार्यालय में जा सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यालय के ब्यौरे भी अनिवार्य रूप से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के परिसरों में प्रदर्शित किए जाने चाहिएं।

जी, नहीं। मल्टीलेवल विपणन कंपनियां, प्रत्यक्ष बिक्री कंपनियां, ऑनलाइन बिक्री कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक की परिधि में नहीं आती हैं। इन कंपनियों की गतिविधियां संबंधित राज्य सरकार के विनियामक/प्रशासनिक क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं।
हाउसिंग फाईनेंस कंपनियां, मर्चेंट बैंकिंग कम्पनियां, स्टॉक एक्सचेंज, स्टॉक ब्रोकिंग/सब-ब्रोकिंग के व्यापार में कार्यरत कम्पनियां, वेंचर कैपिटल फंड कम्पनियां, निधि कंपनियां, बीमा कंपनियां और चिट फंड कम्पनियां गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां है परंतु कुछेक शर्तों के अध्यधीन, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA के तहत इन्हें पंजीकरण से छूट प्राप्त है। 
हाउसिंग फाईनेंस कंपनियों का विनियमन नेशनल हाउसिंग बैंक द्वारा किया जाता है। मर्चेंट बैंकर्स/वेंचर कैपिटल फंड कंपनी/स्टॉक एक्सचेंज/स्टॉक ब्रोकर्स/सब-ब्रोकर्स का विनियमन भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा किया जाता है तथा बीमा कंपनियों का विनियमन बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा किया जाता है। इसी प्रकार, चिट फंड कंपनियों का विनियमन संबंधित राज्य सरकारों और निधि कंपनियों का विनियमन कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जाता है।

1.  निवेशक को यह जांच करना आवश्यक है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के पास सार्वजनिक जमा स्वीकार करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किया गया विशिष्ट प्राधिकार है।
2.  जमाकर्ताओं को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा यथानिर्धारित जमा योजना ऑफर की जांच और खासतौर पर इसकी अवधि, ब्याज दर आदि के संबंध में सुनिश्चित होना चाहिए।
3.  जमाकर्ता को अपनी जमा रसीद पर खासतौर पर जमाकर्ता का नाम, जमा की तारीख और उसकी परिपक्वता, दिए गये ब्याज की दर (उसके चक्रवृद्धि के साथ, यदि कोई हो) शब्दों आंकड़ों में राशि और सबसे महत्वपूर्ण-प्राधिकृत अधिकारियों के हस्ताक्षर की जांच करने की आश्यकता है। 
4.  गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की ओर से सार्वजनिक जमाओं को एकत्रित करने वाले ब्रोकरों/एजेंटों आदि के मामले में एचेंट की पहचान को सत्यापित करना चाहिए।
5.  जमाकर्ताओं को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की रेटिंग की जांच उक्त गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनीयों में जमा करने से पहले करनी चाहिए, चूंकि भारतीय रिजर्व बैंक कोई जिम्मेदारी स्वीकार नहीं लेता। रेटिंग अनिवार्य है, इसलिए यह सुनिश्चित होनी चाहिए। कृपया नोट करें कि केवल 5 रेटिंग एजेंसियां नामतः क्रिसील, केयर, आई.सी.आर. और एफ.आई.टी.सी.एच., रेटिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और ब्रिकवर्क रेटिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, प्राधिकृत कंपनी है।
6.  जमाकर्ता को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी की वित्तीय कंपनी की वित्तीय सक्षमता के बारे में अलग से जांच करने की आवश्यकता है।
7.  कम श्रेणीकृत दर वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी में कोई निवेश करने की आवश्यकता नहीं है।
8.  यदि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी जमा राशि के पुनर्भुगतान में कोई चूक करती है तो जमाकर्ता को जमाओं की वसूली करन के लिए कंपनी लॉ बोर्ड अथवा उपभोक्ता मंच अदालत में सिविल मुकदमा दायर करना चाहिए। कृपया नोट करें कि जमाकर्ता किसी एक अथवा सभी निवारण प्राधिकरणों अर्थात् उपभोक्ता मंच, न्यायालय अथवा कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में जा सकता है।
9.   गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के विरूद्ध शिकायतों की सुनवाई के लिए कोई लोकायुक्त नहीं है, तथापि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के क्रेडिट कारड ऑपरेशन के मामले में, उपभोक्ता को बैंकिंग लोकायुक्त के पास जाना चाहिए, यदि शिकायतकर्ता शिकायत दर्ज करवाने की तारीख से अधिकतम 30 दिनों की अवधि के अंदर कोई संतोषजनक समाधान प्राप्त नहीं होता।
10. गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के अधिक जमाओं के मामले में, जमाकर्ता को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के पास अपनी जमाओं की परिपक्वता की तारीख को ब्याज का दावा करना चाहिए, अन्यथा अधिक ब्याज की दर केवल दावे की तारीख को दी जाएगी।
11. ग्राहक को भारतीय रिजर्व बैंक के शिकायत निवारण अधिकारी और नियंत्रण अधिकारी का नाम पता नोट करना चाहिए। यह गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के परिसरों में उपलब्ध होना चाहिए।
1.  जमाओं पर ब्याज के साथ किसी प्रकार के उपहार अथवा प्रोत्साहन से बहकावे में न आएं।
2.  गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी अप्रवासी भारतीय से जमाराशि स्वीकार नहीं कर सकती। इसलिए अप्रवासी उपभोक्ता को नई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी में निवेश करने की आवश्यकता नहीं होगी।
3.  किसी भी प्रकार के अधिक भुगतान को स्वीकार न करें।