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उपभोक्ता सहायता पोर्टल (संस्करण 2.1)
टेलीविजन, रेडियो, या अन्य किसी इलैक्ट्रॉनिक मीडिया, समाचारपत्रों, बैनरों, पोस्टरों, हैंडबिलों, दीवारों पर लिखकर इत्यादि माध्यमों से वस्तुओं, सेवाओं अथवा वाणिज्यिक गतिविधियों की प्रकृति, विशिष्टताओं, गुणों अथवा भौगोलिक मूल को अनुचित तरीके से पेश करके उपभोक्ताओं को भ्रमित करने के लिए किया गया कोई विज्ञापन अथवा प्रचार सामान्य तौर पर भ्रामक विज्ञापन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
  • जब किसी खाद्य तेल के विज्ञापन में यह दर्शाया जाता है कि जब तक आप उस विशिष्ट तेल को प्रयोग कर रहे हैं तब तक आप हृदय की समस्याओं से मुक्त रहेंगे, तो यह एक मिथ्या तथ्य है।
  • जब किसी वॉटर प्यूरीफायर, जो केवल बैक्टीरिया को फिल्टर करता है (और वायरस को नहीं), के विज्ञापन में यह दर्शाया जाता है कि वह 100 प्रतिशत शुद्ध पानी देता है, तब यह एक झूठा विज्ञापन है।
  • जब कोई सेलफोन सेवा प्रदाता एस0टी0डी0 कॉल्स 40 पैसे प्रति मिनट की दर पर देने का वादा करता है किन्तु यह नहीं बताता कि यह दरें केवल उसी सेवा प्रदाता द्वारा प्रदान की जा रही सेवा वाले नम्बर पर लागू होंगी, तो यह भ्रामक हो जाता है।
  • जब कोई विनिर्माता यह दावा करता है कि उसके द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे रेफ्रीजरेटर सबसे उत्तम है अथवा उसमें रखा गया भोजना रोगाणु-मुक्त है, तो उसे इस दावे की पुष्टि के संबंध में पर्याप्त आंकड़ें उपलब्ध कराने चाहिए, अन्यथा, यह एक मिथ्या कथन हो जाता है।
  • जब किसी डिटेर्जेन्ट के विज्ञापन में यह दर्शाया जाता है कि यह केवल एक बार कपड़े धोने से ग्रीस हटा सकता है – तो वह ऐसा करने में सक्षम होना चाहिए और विनिर्माता को इसे सिद्ध करना चाहिए। अन्यथा, यह एक असत्य अथवा झूठा कथन माना जाएगा।
  • जब किसी विज्ञापन में यह वादा किया जाता है कि जब कभी भी आप विज्ञापित उत्पाद खरीदेंगे तो आपको एक “मुफ्त गिफ्ट” दिया जाएगा, ऐसी स्थिति में गिफ्ट मुफ्त ही होना चाहिए। यदि विनिर्माता, बताए गए गिफ्ट की या तो पूरी या फिर आंशिक कीमत वसूलता है, तो ऐसा विज्ञापन, झूठा और भ्रामक माना जाता है।
  • यदि कोई खुदरा विक्रेता यह दावा करता है कि वह अपने उत्पाद पर किसी त्यौहार के अवसर पर कोई विशेष छूट प्रदान कर रहा है, जबकि वास्तव में वह त्यौहार के अवसर को अपनी पुरानी और घटिया वस्तुओं से छुटकारा पाने के रूप में प्रयोग कर रहा है, तो वह उपभोक्ताओं को धोखा दे रहा है।
  • जब किसी टूथपेस्ट के विज्ञापन में यह दर्शाया जाता है कि इससे कैविटीज़ की रोकथाम होगी, तब विनिर्माता को ऐसा सिद्ध करने के लिए आंकड़े प्रस्तुत करने होते हैं, यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है, तो वह एक निराधार दावा कर रहा है अथवा झूठा विज्ञापन कर रहा है।
  • यदि किसी फेश क्रीम के विज्ञापन में यह दावा किया जाता है कि इससे काले धब्बे बिल्कुल खत्म हो जाते हैं और यहां तक कि पुनः काले धब्बों होने से भी रोकथाम होती है, तो विनिर्माता को ऐसा सिद्ध करने में सक्षम होना चाहिए। अन्यथा, यह एक कपटपूर्ण विज्ञापन है।
  • यहां तक कि किसी विज्ञापन के नीचे, उत्पाद के संबंध में दी जा रही महत्वपूर्ण जानकारी को छोटे अक्षरों में कम करना भी एक अनुचित व्यापार व्यौहार माना जाता है, विशेषकर जब ऐसी जानकारी उपभोक्ता के लिए सुस्पष्ट न हो।
सरकार के ध्यान में लाने के लिए, ऐसे किसी भी विज्ञापन की प्रति/वीडियो/ऑडियो के साथ आप अपनी शिकायत, भारत सरकार के वेब पोर्टल https://gama.gov.in पर दर्ज करवा सकते हैं।
स्तर 1: कोई भी शिकायत दर्ज करने के लिए एक बारगी पंजीकरण की आवश्यकता होती है। पंजीकरण के लिए, वेब पोर्टल https://gama.gov.in पर जाएं तथा लॉग-इन लिंक पर क्लिक करें और स्वयं को पंजीकृत करें, अपने ई-मेल/मोबाईल से सत्यापित करें और यूजर-आईडी तथा पासवर्ड बनाएं।
स्तर 2: इस यूजर-आईडी और पासवर्ड का प्रयोग करते हुए, पोर्टल में दाखिल हो तथा आवश्यक ऑडियो/वीडियो/पेपर क्लिप/फोटोग्राफ (यदि उपलब्ध हों) को संलग्न करते हुए अपेक्षित ब्यौरे भरें।
अपनी यूजर-आईडी तथा पासवर्ड का प्रयोग करते हुए लॉग-ईन करके आप अपनी शिकायत की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
भ्रामक विज्ञापन के विरूद्ध कार्रवाई के लिए, आपकी शिकायत को, संबंधित प्राधिकरण को अग्रेषित किया जाएगा। भ्रामक विज्ञापन तथा भारतीय विज्ञापन मानक परिषद के संबंध में अधिक जानकारी के लिए कृपया http://ascionline.org/index.php/faqs.html पर जाएं। अधिक जानकारी के लिए कृपया https://gama.gov.in/Default.aspx पर जाएं।