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किसी मानक का तात्पर्य ऐसे दस्तावेज से है जो अपेक्षताओं, विशिष्टताओं, मार्गनिर्देशों अथवा विशेषताओं की जानकारी उपलब्ध कराता है जिसे निरंतर यह सुनिश्चित करने के उपयोग किया जा सकता है कि कोई सामग्री, उत्पाद, प्रक्रिया अथवा सेवा अपने उद्देश्य के लिए परिपूर्ण है।
वस्तुओं एवं सेवाओं के विकास, विनिर्माण एवं आपूर्ति को और अधिक प्रभावी, सुरक्षित एवं स्वच्छ बनाने में सहायक होते हैं। देशों के बीच होने वाले व्यापार को आसान तथा उचित बनाते हैं क्योंकि विभिन्न देशों में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मानकों के रूप में समान विनिर्देशनों को अपनाया जाता है।
  • मानक, आर्थिक वृद्धि में, पेटेंट्स और लाईसेंसों की तुलना में ज्यादा योगदान देते हैं।
  • मानक, कंपनियों के सामरिक महत्व को दर्शाते हैं।
  • जो कंपनियां मानकों के कार्य में सक्रियता से भाग लेती हैं उन्हें बाजार मांग को अपनाने में अपने प्रतिस्पर्धियों से शीर्ष स्थान प्राप्त होता है।
  • मानकीकरण की प्रक्रिया में योगदान करने वाली कंपनियों के अनुसंधान जोखिमों तथा विकास लागतों में कमी आती हैं।
  • जो व्यापारी सक्रियता से मानकों के कार्य में शामिल होते हैं उन्हें प्रायः ज्यादातर मानकों के कार्य में भागीदारी न करने वाले व्यापारियों की तुलना में कम मेहनत करके लागतों के संबंध में दीर्घकालिक लाभ और बेहतर प्रतिस्पर्धी स्थिति प्राप्त होती हैं।
  • मानकों के विकास में भागीदारी किसी व्यक्ति को प्रौद्योगिक मानकीकरण के अनुमान लगाने में सक्षम बनाती है जिससे उसे अपने उत्पादों को प्रौद्योगिकी के साथ-साथ उन्नत करने की सुविधा प्राप्त होती है।
  • प्रौद्योगिकी में अग्रणी व्यापारियों को मानक तैयार करने में और अधिक संलिप्त होना चाहिए।
  • आई.एस.ओ. का अर्थ अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (International Organizaton for Standardization) है। यह स्विट्जरलैण्ड में स्थित है और इसकी स्थापना वर्ष 1947 में अनेक क्षेत्रों में समान अंतर्राष्ट्रीय मानकों को विकसित करने के लिए की गई थी। इसमें लगभग 150 राष्ट्रीय मानक निकायों के सदस्य होते हैं।
  • आई.एस.ओ.:9000 एक जैनेरिक नाम है जो मानकों के एक समूह को दिया गया, जिसे एक ढांचा, जिसके अंतर्गत एक गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली को प्रभावी रूप से कार्यान्वित किया जा सके, उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया।
बी.आई.एस. का अर्थ भारतीय मानक ब्यूरो है।
भारतीय मानक ब्यूरो, किसी वस्तु अथवा प्रक्रिया के संबंध में भारतीय मानकों का सृजन करता है तथा सृजित किए गए मानकों को, जैसा भी आवश्यक हों, उपभोक्ताओं, विनिर्माताओं, सरकार और नियामक निकायों, प्रौद्योगिकीविद्, वैज्ञानिकों और परीक्षण प्रयोगशालाओं को शामिल करके एतदद्वारा गठित समितियों के माध्यम से विचार-विमर्श की एक प्रक्रिया द्वारा सुधार, संशोधित तथा रद्द करता है।
मानक चिह्न के रूप में जाने जाने वाले आई.एस.आई. प्रमाणीकरण चिह्न की किसी उत्पाद पर मौजूदगी उस उत्पाद की विशिष्टताओं के प्रति अनुरूपता का आश्वासन है। अनुरूपता को, औचक निरीक्षण तथा बाजार एवं फैक्ट्री, दोनों से लिए गए नमूनों की जांच के माध्यम से लाईसेंसधारी के निष्पादन की नियमित निगरानी करके सुनिश्चित किया जाता है।
वस्त्र, पैकबंद जल, खाद्य, ऑटोमोबाईल पुर्जे, प्लास्टिक उत्पाद एवं इलैक्ट्रॉनिक्स सहित 16 व्यापक श्रेणियां है जिनके संबंध बी.आई.एस. ने मानक निर्धारित किए हैं।
एगमार्क भारत में कृषि उत्पादों पर अंकित किया जाने वाला प्रमाणन चिह्न है, जो यह आश्वस्त करता है कि ये उत्पाद भारत सरकार की एक एजेंसी, विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय द्वारा अनुमोदित किए गए मानकों के सेट के अनुकूल है।
यह स्वर्ण की शुद्धता को प्रमाणित करता है।
हॉलमार्किंग, सरकार द्वारा प्राधिकृत केंद्रों से कराई जाती है।
5 चीजों का ज्वैलरी पर अंकित होना अनिवार्य है: पहला बी.आई.एस. लोगो, दूसरा, स्वर्ण की शुद्धता (कैरेट) को दर्शाने वाला 3 अंकीय नम्बर, तीसरा, एसेईंग एवं हॉलमार्किंग केंद्र का कोड, चौथा, वर्णानुक्रमक कोड जिससे विनिर्माण के वर्ष का विवरण मिलता है और अंतिम, ज्वैलर का चिह्न।
सामान्यतः निम्नलिखित कैरेटों में स्वर्ण मिलता है:
958, 23 कैरेट के समरूपी
916, 22 कैरेट के समरूपी
875, 21 कैरेट के समरूपी
750, 18 कैरेट के समरूपी
708, 17 कैरेट के समरूपी
585, 14 कैरेट के समरूपी
375, 9 कैरेट के समरूपी
A वर्ष का अर्थ है कि विनिर्माण का वर्ष 2000 है, 2001 के लिए B, 2002 के लिए C तथा आगे इसी क्रम में।
खाद्य उत्पादों में, शाकाहारी उत्पादों के लिए हरे रंग का चिह्न तथा गैर-शाकाहारी उत्पादों में भूरे रंग का चिह्न उपयोग किया जाता है।
सिल्क चिह्न यह प्रमाणित करता है कि किसी वस्त्र का भाग शुद्ध सिल्क का बना हुआ है। इसका प्रबंधन ‘सिल्क मार्क आर्गेनाईजेशन ऑफ इंडिया’ द्वारा किया जाता है।
साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट एवं अन्य प्रसाधन सामग्रियों तथा टॉयलेटिरीज़ वाले प्रत्येक पैकेज पर गैर-शाकाहारी सामग्री से बने उत्पाद पर भूरे रंग तथा शाकाहारी सामग्री से बने उत्पाद पर हरे रंग का चिह्न अंकित होता है।
बी.ई.ई. का अर्थ ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशियेंसी) है जिसका कार्य ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के समग्र ढांचे के अंतर्गत, स्वःविनियमन एवं विपणन सिद्धांतों पर जोर देते हुए नीतियों एवं युक्तियों का विकास करने में सहायता करना है।
बी.ई.ई. का प्राथमिक उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था में ऊर्जा की गहनता को कम करना है।
ईको चिह्न, पारिस्थितिकी तंत्र पर कमतर प्रभाव डालने के उद्देश्य से बनाए गए मानकों के सेट के अनुरूप, भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा किसी उत्पाद पर लगाया जाने वाला एक प्रमाणन चिह्न है।
इस चिह्न का उद्देश्य पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए उपभोक्ताओं में जागरूकता में वृद्धि करना है। यह चिह्न उत्पादों की विभिन्न श्रेणियों के संबंध में जारी किया जाता है तथा और अधिक उत्पादों के लिए मानकों का विकास प्रक्रियाधीन है।