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बालकों की नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा का अधि‍कार अधिनियम अथवा शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 4 अगस्‍त 2009 को भारत की संसद द्वारा अधिनियमित अधिनियम है जिसमें भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 21 के तहत भारत में 6 और 14 वर्ष की आयु के बीच के बालकों के लिए नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा के महत्‍व की रूप रेखाएं वर्णित है।
आप स्‍थानीय प्राधिकारी की वेबसाइट से अपने क्षेत्र में अंग्रेजी और अन्‍य भाषाओं के माध्‍यम से शिक्षा देने वाले स्‍कूलों के बारे में जानकारी प्राप्‍त कर सकते हैं।
जी, नहीं। आपका बच्‍चा कौन-से स्‍कूल में जाए, इस सम्‍बन्‍ध में आप अपनी पसंद तो बता सकते हैं किन्‍तु यदि आवेदन, उपलब्‍ध स्‍थानों से अधिक हों तो हो सकता है कि आपको अपनी पसंद का स्‍कूल न मिले।
स्‍कूल के दाखिला प्राधिकारी द्वारा आपको यथोचित आवेदन फार्म उपलब्‍ध कराया जाएगा। यह स्‍थानीय प्राधिकरी पर निर्भर करता है कि आपको कागज़ पर दिया गया आवेदन फार्म या ऑन लाइन।
कुछेक स्‍थानीय प्राधिकरणों द्वारा स्‍थानीय समाचार पत्रों में अथवा अन्‍य माध्‍यम के जरिए विज्ञापन देकर यह घोषणा करते हैं कि आप आपने बच्‍चे को स्‍कूल में दाखिला दिलवाने के लिए आवेदन कब कर सकते हैं। प्राय: स्‍कूलों मे और अन्‍य प्रिंट तथा इलैक्‍ट्रानिक माध्‍यमों से सूचनाएं भी जारी की जाती हैं। अधिकांश प्रवेश प्राधिकरणों द्वारा अपने स्‍कूलों में दाखिले पूरे सितम्‍बर और अक्‍तूबर के दौरान किए जाते हैं और ये कम से कम छ: सप्‍ताह तक चलते हैं।
प्रवेश प्राधिकरणों को उपलब्‍ध स्‍थानों (प्रवेश संख्‍या) की संख्‍या तक बच्‍चों को अनिवार्यत: दाखिला देना होता है। यदि प्रवेश संख्‍या से अधिक आवेदन आते हैं तो प्रवेश प्राधिकरण स्‍कूल में बच्‍चों को दाखिला दिलवाने के नियमों की सूची के अनुसार बच्‍चों को दाखिला देंगे। इसमें वे ऐसी बातोंको भी दष्टिगत रख सकते हैं कि आप स्‍कूल के पास कितने नजदीक रहते हो; अथवा स्‍कूल में आपका कोई भाई अथवा बहन पहले से ही तो नहीं पढ़ता है; प्रवेश प्राधिकरण द्वारा जानकारी की पुस्तिका में अथवा अपनी वेबसाइट पर अभिभावकों के लिए पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।
बच्‍चों के लिए नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम अथवा शिक्षा का अधिकार अधिनियम, भारत की संसद द्वारा दिनांक 4 अगस्‍त, 2009 को अधिनियमित किया गया अधिनियम है जिसमें, भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 21क के तहत भारत में 6 से 14 वर्ष की आयु के बीच के बालकों के लिए नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा के महत्‍व की लागू किए जाने योग्‍य रूप रेखाओं का उल्‍लेख किया गया है। कभी-कभी सितम्‍बर के आरम्‍भ में ही स्‍थान उपलब्‍ध होते हैं क्‍योंकि स्‍कूल में संभावित दाखिला लेने वाले बच्‍चे कुछ कारणों की वजह से दूसरे स्‍कूल में चले जाते हैं। कई बार कोई स्‍थान उपलब्‍ध नहीं होता।

यदि आपके बच्‍चे की विशिष्‍ट शैक्षिक आवश्‍यकताएं हैं तो आपको मुख्‍य धारा वाले स्‍कूलों में दूसरों की तरह आवेदन करने की आवश्‍यकता है। शिक्षा प्राधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होता है कि सरकार से निधियां (निशक्‍त व्‍यक्ति अधिनियम, 1995 के तहत) प्राप्‍त करने वाले सभी संस्‍थानों में दिव्‍यांगों के लिए 3% आरक्षण उपलब्‍ध हो।
आप दाखिले हेतु विशेष नियमों के लिए संबंधित स्‍कूलों की वेबसाइट अथवा राज्‍य सरकार की वेबसाइट को देख सकते हैं।